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चैक, कहीं आप नशेयड़ी तो नहीं हैं

anita-banglore1.jpgचैक, आप नशेयड़ी तो नहीं हैं

अनिता कुमार, शेयर बाजार और मनोविज्ञान की विशेषज्ञ

 रिकैप-स्टाक बाजार और मनोविज्ञान की विशेषज्ञ अनिता कुमारजी ने पिछले लेख में -कानफ्लिक्टेड इनवेस्टर, रिवेंजिंग एंड कंज्यूमेटेड इनवेस्टर, मास्ट इनवेस्टर में बताया था। बाकी के बारे में इस बार बता रही हैं। पहचान लीजिये कि आप कौन हैं। 

 फसी कस्टमर-गिटपिट वाले 

ये बहुत ज्यादा परफेक्शनिस्ट होते हैं। पर डिसीजन नहीं ले पाते, वे निवेश की निटी ग्रिटी में फंस जाते हैं। मतलब कौड़ियों पर मुहर लगाने वाले ये निवेशक रुपयों के बारे में ज्यादा सावधान नहीं होते। ये आम तौर पर रिएक्टिव होते  हैं। हर समय हिचकते हैं।

इत्ती छोटी-छोटी चीजों पर फोकस करते हैं कि बड़ी चीजें हाथ से निकल जाती हैं। ये बहुत टेंस हो जाते हैं। हमेशा सोचते हैं कि जिस टाइम निवेश किया था, वह निवेश करने का सही समय था या नहीं। ब्रोकर से बार बार बात करते हैं। इन्हे बराबर यह लगता है कि उनके साथ धोखा किया जा रहा है। कई बार ये खुद पर ही नियंत्रण नहीं रख पाते, और उत्तेजित हो जाते हैं।

ये आम तौर पर रद्दी प्रेमी होते हैं। तमाम कंपनियों की पुरानी एनुअल रिपोर्टें रखते हैं। पुराने लेख रखते हैं। बातें बहुत करते हैं,पर ये पैसा नहीं बना पाते। हालांकि इनके साथ एक घंटा आप गुजार लें,तो आप यह इंप्रेशन ले सकते हैं कि इन्होने बहुत पैसा पीटा होगा। पर सच यह है कि पैसे से ज्यादा ये अपने माथे को पीटते रहते हैं। 

  डिप्रेस्ड इनवेस्टर- संसार दुःख है।

ये परमानेंट दुःखी आत्माएं होती हैं।

कोई इन्हे अमेरिका का राष्ट्रपति भी बना दे, तो व्हाईट हाऊस में जाकर यही देखेंगे कि रुम नंबर 78 की चौथी खिड़की का एक बोल्ट ढीला है। और फिर ये उस पर फोकस हो जाते हैं। दुःख को तलाशना और उसे हमजोली बनाना इनकी हाबी है। 

इनकी पहचान यह है कि ये चाहे नोट कमायें, या गवायें, ये रहते हमेशा दुःखी रहते हैं। पैसा कमा लें, तो कहते हैं कि मेरा क्या, ये तो लक ने साथ दे दिया, जो कभी कभार ही साथ देता है।

लक का क्या भरोसा करें, सो दुःखी। और पैसा गंवाये, तो दुःखी होने का स्वाभाविक कारण बनते ही हैं। ये कमायें या गवायें, दुःखी मुद्रा इनके लिए परमानेंट है।सच तो यह है कि यह है कि ये शेयर बाजार में कम, दुःख में ज्यादा इनवेस्टमेंट करते हैं।  

एडिक्टेड इनवेस्टर-नशेयड़ी-

बोले तो ये शेयर के नशेड़ी हो लेते हैं, यानी नशेयड़ी।

ये निवेश को ड्रग एडिक्शन की तरह लेते हैं। और कमाल यह है कि इनमें से कई मानने को तैयार नहीं होते कि वे नशेयड़ी हो गये हैं।  जिस तरह आम तौर पर दारुबाज यह मानने को तैयार नहीं ना होता कि हम दारुबाज हैं, इसी तरह नशेयड़ी यह मानने को तैयार नहीं होते कि वे नशेयड़ी हैं। ये दरअसल जुआरी होते हैं, हारें या जीतें, इनके लिए मुद्दा यह नहीं है। जुआ खेलना महत्वपूर्ण है। 

निवेश करना उन्हे उसी तरह से किक देता है, जैसे नशेबाज को मिलता है। यह बहुत खतरनाक टाइप के निवेशक हैं।  पेरानोइड इनवेस्टर-शक्की और झक्की इनवेस्टरये एक आंख अपने ब्रोकर पर रखते हैं, एक बाजार पर रखते हैं। ये किसी पर यकीन नहीं करते।

 शक इनके जीवन का परमानेंट भाव है। ये हमेशा परेशान रहते हैं। शक करते हैं कि इनके डिमैट एकाऊंट से कोई शेयर निकाल कर ले जायेगा। कोई  इनके बैंक से पैसा निकाल कर ले जायेगा। ये आम तौर पर नयी कंपनी के शेयरों में निवेश नहीं करते और इसलिए किसी नयी कंपनी के शेयरों के फायदों से वंचित रहते हैं।  

सोशोपैथिक क्रिमिनल-यानी पराया माल अपना

ये निवेशक मूलत क्रिमिनल दिमाग के होते हैं।

हर्षद मेहता इसी तरह के निवेशकों में गिने जाते थे। किसी भी तरह से, कहीं से भी रकम जुगाड़कर अपना उल्लू साधो। इन निवेशकों में किसी भी तरह की नैतिकता नहीं होती। ऐसे निवेशक समाज के लिए, देश के लिए बहुत घातक होते हैं।  इन सारे व्यक्तित्वों के लिए सुझाव अगले लेख में पेश किये जायेंगे। नोट करने की बात यह है कि व्यक्तित्व जैसा एक बार बन गया,उसे बदला नहीं जा सकता। हां उसके हिसाब से रणनीतियां जरुर बनायी जा सकती हैं।        

August 6, 2007 - Posted by smartnivesh | investment, shares | | 8 Comments

8 Comments »

  1. अच्छी जानकारी दी है. धन्यवाद. आगे कुछ शेयरों से कमाने के तौर-तरीके बताएँ तो और अच्छी बात होगी.

    Comment by Isht Deo Sankrityaayan | August 6, 2007

  2. यही गड़बड़ है – सभी इष्ट देव जी की तरह ताबड़ तोड पैसा कमा कर प्रेम से कविता या ब्लॉग ही लिखना चाहते हैं. हम भी! :)
    पर यहां अगड़म-बगड़म नहीं, चीजें साफ करते चलें.
    हमारी वेराइटी के इंवेस्टर अभी आये ही नहीं अनिता कुमारजी के डिस्कशन में! :)

    Comment by ज्ञान दत्त पाण्डेय | August 6, 2007

  3. हमारा शेयर में बिल्कुल रुझान नहीं है लेकिन आपका लिखना रोचक है। आगे भी पढ़ने का विचार बना ही लिया है। :)

    Comment by अनूप शुक्ल | August 6, 2007

  4. सही कहा है आपने… ऐसे लोगो से पाला पड़ता रहता है, वैसे इस तरह के सनक के लोग हर क्षेत्र मे मिल जाते हैं। :)

    Comment by गरिमा | August 6, 2007

  5. नशयेड़ी टाईप इन्वेस्टरस से हम दिन भर मिलते रहते हैं यहाँ. :)

    बहुत सही और रोचक विष्लेषण रहा. आगे इन्तजार है.

    Comment by समीर लाल | August 6, 2007

  6. ha aap ne bhut hi shi trike se ye baate khi hai. me ek share market ka invester hu aaap shi hai.

    Comment by mukesh | August 6, 2007

  7. Dear Anita ji, I have never invested in shares. But your araticle on the share market and investors and their different kinds is very interested. The article is very knowledgable. I think u must give such artaicles in the books or news papers which are basically related to the share market. I hope, your guidance will be very useful to the investors. You have deeply studied different types of investors i.e. fussy investors, depressed investors, adicted investors, and above all the investors who r kind of – “paraya maal apna” wale logon ki kahani jo log doosron ko shishe main utarne main hi mahir hote hai. akshar society ko ya investors ko aise lebhagu type ke ring masters’ se bach kar rahna chahiye. Awaiting such another article.

    Comment by rajeshtrive | August 10, 2007

  8. This is an excellent analysis of investors mindset. Using common language blended with humour, Anitaji has made it very interesting and very readable. A very well written article.

    Comment by k.Radhakrishnan | August 16, 2007


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