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अपनी रकम शेयर बाजार में आप ही डुबोते हैं, ऐसे….

अपनी रकम शेयर बाजार में आप ही डुबोते हैं,ऐसे… बता रही हैं शेयर और मनोविज्ञान की एक्सपर्ट डा.अनिता कुमार

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  • जी कोई और नहीं, सिर्फ और सिर्फ आप ही शेयर बाजार में अपनी लुटिया डुबोते हैं।

  • इसलिए कि आपको पता नहीं होता कि आप किस टाइप के इनवेस्टर हैं।बिना खुद को जाने हुए शेयर बाजार को नहीं जाना जा सकता। खुद को जाने बगैर, अपने व्यक्तित्व को समझे बगैर जो इनवेस्टर शेयर बाजार में जाते हैं, बाजार उनकी रकम हजम कर लेता है। आत्मज्ञान बहुत जरुरी है। मुंबई विश्वविद्यालय के एक कालेज के मनोविज्ञान विभाग की अध्यक्षा और शेयर बाजार की पुरानी निवेशक डा. अनिता कुमार का यही मानना है। वह बता रही हैं, इनवेस्टर कितने टाइप के होते हैं। जरा ताड़िये कि आप किस कैटेगिरी में आते हैं, हो सकता है कि आप एक से ज्यादा कैटेगिरी में आते हों।

  •  इंग्लैंड के शेयर ब्रोकर-इरा एब्सटीन और डेविड गारफील्ड ने शेयर निवेश के मनोविज्ञान पर जमकर शोध की है। खूबी यह है कि ये शेयर ब्रोकर खुद मनोविज्ञानी भी रहे हैं। सो इन्होने शेयर को मन के जगत की निगाह से देखा और मन के जगत को शेयर की निगाह से देखा है। कई तरह की वैराइटी हैं-

 कानफ्लिक्टेड इनवेस्टर या खुदझगड़ू निवेशक-बहुत चिंता में डूबे रहते हैं। समझिये कि खुद से लड़ते हैं। अपने आप से डिबेट करते हैं। एक सौदे के बारे में सोचते हैं कि अरे बहुत बढ़िया हो गया। दूसरे ही क्षण कहते हैं कि नहीं बहुत घटिया काम हुआ है। एक मिनट में जो सौदा लाखों देता लगता है, दूसरे ही क्षण उस सौदे में ससब कुछ डूबा हुआ दिखता है।  खुदझगड़ू निवेशक खुद से झगड़ने में इत्ता समय लगा देता है कि कई धांसू अवसर उसके हाथ से निकल जाते हैं।

रिवेंजिंग एंड कंज्यूमेटेड टाइप बोले तो शेयरडूबू निवेशकमतलब ये शेयर में इत्ता ज्यादा डूब जाते हैं कि सच में ही इनका निवेश डूब जाता है। मतलब ये हमेशा अपने सौदों के बारे में, निवेश के बारे में सोचते हैं, उनके बारे में बात करते हैं। इतना ज्यादा शेयर शेयर करते हैं कि आबजेक्टिविटी से दूर हो जाते हैं। उसमें लिप्त हो जाते हैं। वो सोचते हैं कि शेयर बाजार ही जिंदगी है। जिंदगी शेयर बाजार है। जरा देखिये आपके आसपास कोई दिन रात गुणा भाग में लगा हो। या क्या पता आप खुद ही हों, जो दिन-रात डिवीडेंट, अप, डाऊन, डो जोन्स, सेनसेक्स, निफ्टी, हंड्रेड परसेंट या फिफ्टी के लपेटे में रहते हैं। इनकी दिक्कत यह है कि ये  कभी संतुष्ट नहीं होते, जानकारियों से। जानकारी, जानकारी और आंकड़े। सच बात तो यह है कि ऐसे शेयरडूबू निवेशक का आम तौर पर सब कुछ डूब जाता है। 

 मास्ट इनवेस्टर यानी मुखौटा इनवेस्टर ऐसे निवेशक मन ही मन वह नहीं होते, जो ये सच में होते हैं। मन ही मन ये खुद को निवेश का सुपर स्टार समझते हैं। मन ही मन ये खुद को राकेश झुनझुनवाला, या पीटर लिंच या वारेन बूफे या एक जमाने के हर्षद मेहता भी समझते हैं। ये हमेशा अपने से ज्यादा सफल निवेशकों की और देखते हैं। और उन जैसा होने की कोशिश करते हैं। ऐसे निवेशक अतियों पर जा सकते हैं। सब कुछ दांव पर लगाने की प्रवृत्ति इनमें पायी जाती है। ऐसे निवेशक आम तौर पर आखिरी में खल्लास हुए ही पाये जाते हैं।

  • अगर आप को पता लग पाये कि आप किस टाइप के इनवेस्टर है, तो भी एक बात साफ है कि आपके बुनियादी व्यक्तित्व को नहीं बदला जा सकता है। वह तो बन चुका है।

  •  हां इतना जरुर किया जा सकता है कि आपको कुछ तरकीबें बतायी जा सकती हैं, जिनसे आप अपनी रकम को तेज गति से बढ़ा सकते हैं। मतलब शेयर बाजार में हरेक बंदे के मर्ज अलग है, सो दवा भी अलग है। खैर, अभी दवा का इंतजाम भी करेंगे, कल आपको और इनवेस्टर टाइपों के बारे बतायेंगे।

  • तो मिलते हैं एक ब्रेक के बाद।

  •   डा. अनिता कुमार 

August 3, 2007 - Posted by smartnivesh | investment | | 6 Comments

6 Comments »

  1. सु स्वागतम आपका ,अब कृपया चालू ही रहे..हमे इंतजार है आपकी अगली राय का..

    Comment by arun arora | August 3, 2007

  2. इसी लिये तो शेयर बाजार को fool’s market कहा गया है कि ९०% से ज्यादा निवेशक जानते ही नहीं कि वो क्या कर रहे हैं. Buy low, sell high की बेसिक भूल कर हमेशा उल्टा ही चलते हैं यह लोग. स्मार्ट मार्केट प्लेयर्स इन्हें बड़ी श्रृद्धा भाव से देखते है, आखिर सोने के अंडे यही मुर्गियां तो देती हैं.

    आपकी अगली कड़ी का इन्तजार है.

    Comment by समीर लाल | August 3, 2007

  3. ये ब्रेक के बाद का कंटिया दुखदाई है. फुरसतिया स्टाइल में पोस्ट लम्बी हो तो होने दें. इसी ब्रेक के चक्कर में तो ये वाली पोस्ट फिर रेफर करनी पड़ेगी.
    बहुत अच्छा है.

    Comment by ज्ञान दत्त पाण्डेय | August 3, 2007

  4. Very true. Many times we plunge in to unknown territories without knowing the risks involved. Many of the reckless investors are themselves responsible for their doom.Every investor should go through this article.

    Comment by k.Radhakrishnan | August 16, 2007

  5. मुम्बई स्टाक एक्सचेंज का संवेदी सूचकांक जिसे संक्षेप में सेंसैक्स कहा जाता है, जो वहां के सर्वोच्च 30 शेयरों पर आधारित है। उन 30 शेयरों के नाम क्या है ?

    Comment by Diwaakar Pratap Singh | August 18, 2007

  6. i want to know about shayer market

    Comment by lirajen | November 30, 2008


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