Smart Nivesh

कमाई की बातें, उस हिंदी में, जिसे आप समझते हैं

नये बैंक बनाम पुराने बैंक

नये बैंक बनाम पुराने बैंक        

आलोक पुराणिक

      sbi_logo_main1.gifस्टेट बैंक इस देश का सबसे बड़ा बैंक है, अगर ब्रांच नेटवर्क की बात करें। आयु के मामले में भी यह बैंक खासा पुराना बैंक है। पर शेयर बाजार की निगाह में इस पूरे बैंक की  कीमत है-करीब 69,663 करोड़ रुपये(15 जून, 2007)। सिद्धांतत अगर किसी की जेब में इतनी रकम हो, वह इस बैंक को पूरा का पूरा खरीद सकता है।

      यह रकम खासी बड़ी रकम है। पर यह छोटी लगने लगती है, यह अगर यह पता चलता है कि स्टेट बैंक के सामने आयु के लिहाज से लगभग शिशु बैंक आईसीआईसीआई की बाजार वैल्यू 15 जून  2007 को थी-करीब 81,654 करोड़ रुपये।      

 आयु के लिहाज से यह नया बैंक पुराने स्टेट बैंक से बहुत आगे है।   

    icici.jpgइसकी वजह सिर्फ आक्रामक मार्केटिंग रणनीति नहीं है। इसकी वजह यह भी है कि निवेशकों को लगता है कि आने वाले समय में बैंकिंग क्षेत्र के लिए जो चुनौतियां आने वाली हैं, आईसीआईसीआई उनसे निपटने में पूरे तौर पर लैस है।   

    शेयर बाजार में इस समय नये और पुराने बैंकों के मूल्यांकन का हिसाब-किताब देखें, तो पता लगता है नये बैंकों के भविष्य को लेकर ज्यादा सकारात्मक अनुमान लगाये जा रहे हैं। निश्चय ही ये अनुमान एक हद तक पुराने परिणामों पर ही आधारित हैं। उदाहरण के लिए अगर आईसीसाईसीआई के आंकड़ें देखें, तो पता लगता है कि अब एक साल  पहले यानी 15 जून 2006 को इसका भाव था-482.55 रुपये और 15 जून 2007 को इसका  भाव था 908.70 रुपये। यानी एक साल में इस शेयर ने करीब सत्तासी प्रतिशत बढ़ गये।       2005-06 में इसका शुद्ध मुनाफा था-2540.07 करोड़ रुपये, यह 2006-07 में बढ़कर 3110.22 करोड़ रुपये पर पहुंच गया, यानी करीब बाईस प्रतिशत का इजाफा।    

   इसके मुकाबले स्टेट बैंक आफ इंडिया ने मुनाफे की बढ़ोत्तरी की बहुत धीमी रफ्तार दिखायी है।     

  2005-06 में स्टेट बैंक आफ इंडिया का शुद्ध मुनाफा था-4406.67 करोड़ रुपये, यह 2006—07 में यह बढ़कर 4541.31 करोड़ रुपये हो गया। यानी करीब तीन प्रतिशत की बढ़ोत्तरी। अगर इस अवधि में मुद्रा-स्फीति की दर औसतन पाँच प्रतिशत मानें, तो यह बढ़ोत्तरी बढ़ोत्तरी नहीं दिखायी देगी।       15 जून 2006 से 15 जून 2007 की अवधि में स्टेट बैंक के शेयर में करीब बहत्तर प्रतिशत की बढ़ोत्तरी हुई है। 15 जून 2007 को इसका भाव 1324.10 रुपये पर था।     

  एक साल में जो बढ़ोत्तरी स्टेट बैंक आफ इंडिया में हुई है, वह निश्चय ही आकर्षक है, पर आईसीआईसीआई से पीछे है।  

     कुल मिलाकर शेयर बाजार में निजी नये बैंक पुराने सरकारी बैंकों से आगे चल रहे हैं।      

 यूटीआई बैंक की उम्र पंजाब नेशनल बैंक के मुकाबले बहुत कम है। पंजाब नेशनल बैंक का ब्रांच नेटवर्क भी यूटीआई के मुकाबले बहुत व्यापक है। पर शेयर बाजार पंजाब नेशनल बैंक को ज्यादा मूल्यवान बैंक मानता है। 15 जून 2007 को पंजाब नेशनल बैंक की बाजार कीमत करीब 15,500 करोड़ रुपये थी।  यूटीआई बैंक की बाजार कीमत इस तारीख को 18,864 करोड़ रुपये थी।     

  शेयर बाजार यह संदेश दे रहा है कि अगर किसी बैंक की शाखाएं बहुत व्यापक तौर पर दिखायी पड़ती हैं, तो इसका मतलब यह नहीं है कि उस बैंक के मुनाफे भी जोरदार हैं। यह बात स्टेट बैंक और आईसीआसीआई बैंक की तुलना से साफ होती है। नये बैंकों ने साफ किया है कि बगैर शाखाएं खोले हुए भी बैंकिंग की जा सकती है। एटीएम खोलकर बैंकिंग के काफी काम संपन्न किये जा सकते हैं। शाखाएं खोलने में मोटी लागत आती है। सरकार बैंकों ने एक समय खूब शाखाएं खोली हैं। शाखाएं खोलने से लागत तो बढ़ी, पर मुनाफे उस अनुपात में नहीं बढ़े। यही वजह है कि शेयर बाजार का मूल्यांकन सिर्फ  बैंक के साइज पर नहीं हो रहा है। उसके ब्रांच के नेटवर्क के आधार पर नहीं हो रहा है। उसके मुनाफे कमाने की क्षमता के आधार पर हो रहा है।      

 यही वजह है कि केनरा बैंक जैसे पुराने बैंक की बाजार कीमत करीब 9848 करोड़ रुपये है, जो यूटीआई बैंक की बाजार कीमत -18,864 करोड़ रुपये के मुकाबले बहुत कम है।      

स्थिति यह है निजी क्षेत्र का अपेक्षाकृत छोटा बैंक सेंचुरियन बैंक आफ पंजाब का बाजार मूल्य 6065 करोड़ रुपये है, जबकि इंडियन ओवरसीज बैंक जैसे पुराने सरकारी बैंक का बाजार मूल्य 6134 करोड़ रुपये था, 15 जून, 2007 को। एकदम नये निजी बैंक यस बैंक की बाजार कीमत भी करीब 4290 करोड़ रुपये है।      

 कुल मिलाकर शेयर बाजार यही साफ होता है कि तजुरबे और पुरानी आयु का बहुत ज्यादा महत्व नहीं है, खास तौर पर  बैंकिंग शेयरों के लिए। बल्कि एक हद तक पुराना होना एक किस्म का नकारात्मक कारक बन रहा है। पुराने बैंकों के पास यह स्कोप नहीं होता कि वे सारे कामकाज को कंप्यूटरीकृत कर लें। बैंकिंग उद्योग में नये बैंकों को शेयर बाजार में ज्यादा भाव दिये जा रहे हैं।      

इसका असर यह होगा कि भविष्य में जब तमाम बैंक  बाजार में और  पूंजी उगाहने आयेंगे, तो निश्चय ही निजी क्षेत्र के बैंकों सरकारी बैंकों के मुकाबले ज्यादा सकारात्मक दृष्टिकोण से देखा जायेगा। गौरतलब है कि आने वाले दिनों में कई बैंक शेयर आदि के जरिये पूंजी उगाहने की योजना बना रहे हैं। आईसीआईसीआई पूंजी बाजार में पूंजी उगाहने के लिए आने वाला है। पब्लिक सेक्टर के सेंट्रल बैंक की योजना भी पूंजी उगाहने की है।

      पूंजी उगाहने के पीछे तरह-तरह के उद्देश्य काम कर रहे हैं। किसी बैंक को प्रतिस्पर्धा में कारोबार को फैलाना है, किसी को नये बाजार के अनुरुप अपनी तकनीक को ढालना है। जाहिर है, जो बैंक पहले दौर में अपनी तकनीक को नये  बाजार के काबिल बना चुके हैं, वह इस दौर में मजबूती से नये बाजारों पर कब्जा करने में कामयाब होंगे। जैसे आईसीआईसीआई  का इरादा है के ग्रामीण बाजारों पर कब्जा किया जाये। पब्लिक सेक्टर के बैंकों के लिए अभी तो चुनौती यह है कि नयी तकनीक के हिसाब से खुद को कैसे ढालें।

यानी कुल मिलाकर पब्लिक सेक्टर के पुराने बैंक निजी क्षेत्र के नये बैंकों से पीछे चल रहे हैं। शेयर बाजार इस बात को बार-बार रेखांकित कर रहा है।

आलोक पुराणिक मोबाइल-0-9810018799     

June 17, 2007 Posted by smartnivesh | Uncategorized | | No Comments Yet