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पचास कंपनियों में निवेश यानी जूनियरबीस

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आलोक पुराणिक 

फोन था एक मित्र का, बता रहे थे कि सत्तर हजार रुपये फ्यूचर और आप्शन्स में लगा दिये हैं। मैंने पूछा-कभी शेयर में निवेश किया है। उन्होने बताया कि पहली बार इस बाजार में उतरे हैं और सीधे फ्यूचर आप्शन्स में।    

   निवेशकों को एक बात बिलकुल साफ तौर पर ध्यान में रखनी चाहिए कि जिन मामलों की समझ न हो, उनमें भूलकर भी हाथ ना डालें। शेयर बाजार के नये निवेशकों को फ्यूचर आप्शन्स तो दूर सीधे शेयरों में भी निवेश नहीं करना चाहिए। उन्हे मुचुअल फंडों से शुरुआत करनी चाहिए। नये निवेशकों के लिए बेहतर रास्ता मुचुअल फंडों का है।      

बल्कि अब तो ऐसे मुचुअल फंड उपलब्ध हैं, जिनका शेयर बाजार में कारोबार होता है, यानी जिन्हे शेयर की तरह खरीदा-बेचा जा सकता है। एक्सचेंज ट्रेडेड फंड यानी ईटीएफ इसी तरह के फंडों की श्रेणी में आते हैं।     

  उदाहरण के लिए एक ईटीएफ है-जूनियरबीस। यानी इसमें निवेश का मतलब है कि एक साथ देश की पचास कंपनियों में निवेश। बेंचमार्क मुचुअल फंड द्वारा शुरु की गयी इस योजना के तहत निवेश उन पचास कंपनियों में ही किया जाता है जो नेशनल स्टाक एक्सचेंज की जूनियर निफ्टी इंडैक्स का हिस्सा हैं। जूनियर निफ्टी इंडैक्स मूलत उन पचास कंपनियों को समाहित करती है, जो अभी देश की बड़ी कंपनियों में तो शामिल नहीं हैं, पर जो तेजी से विकसित हो रही हैं। इनकी विकास की रफ्तार खासी तेज है। और इसमें किया गया निवेश दीर्घकाल यानी पांच से सात साल बाद बहुत बढ़िया प्रतिफल दे सकता है।    

  निवेशक नेशनल स्टाक एक्सचेंज से जूनियरबीस का शेयर खरीद सकता है। इस निवेश के लिए निवेशक के पास डिमैट एकाउंट होना जरुरी है, क्योंकि जूनियरबीस की खरीद-फरोख्त बतौर शेयर ही होती है।      

 जूनियरबीस की हाल की परफारमेंस इस प्रकार है-आठ जून, 2007 को नेट एसेट वैल्यू- 81.04 रुपयेएक महीने में प्रतिफल- 5.97 प्रतिशततीन महीनों में प्रतिफल-21.01 प्रतिशतएक साल में प्रतिफल- 70.66 प्रतिशत तीन सालों में प्रतिफल- 39.45 प्रतिशत सालाना एक साल पहले जिन निवेशकों ने निवेश किया है, वे करीब 70.66 प्रतिशत का प्रतिफल पा चुके हैं।

इस प्रतिफल को बेहतरीन कहा जा सकता है। तीन सालों का रिकार्ड देखें तो साफ होता है कि इस अवधि में प्रतिवर्ष इसने 39.45 प्रतिशत सालाना का प्रतिफल दिया है। जूनियरबीस में जोखिम कम इसलिए है कि इसमें लगा निवेश पचास कंपनियों जाता है। ये पचास कंपनियां हैं- आंध्रा बैंक, अपोलो टायर्स, अशोक लैलेंड, एशियन पेंट्स लिमिटेड, अरबिंदो फार्मा, एवेंटिस फार्मा, बैंक आफ बड़ौदा, बैंक आफ इंडियाभारत  इलेक्ट्रानिक्स,भारत फोर्ज,बायोकोन, बोनगाईगांव रिफाइनरी, कैडिला हेल्थकेयर, कैनरा बैंक, चेन्नई पेट्रोलियम, कंटेनर कारपोरेशन, कारपोरेशन बैंक, कमिन्स इंडिया, आई फ्लैक्स सोल्यूशन्स, आईबीपी कंपनी,इंडस्ट्रियल बैंक आफ इंडिया, आईएफडीसी,आईएफसीआई, इंडियन होटल्स, इंगरसोल रैंड इंडिया,आईएनजी वैश्य बैंक, इंडियन ओवरसीज बैंक, जयप्रकाश एसोसिएट्स,कोटक महिंद्रा बैंक, एलआईसी हाऊसिंग फाइनेंस , लुपिन लिमिटेड, मोजर बेयर, एमफेसिस लि.,निकोलस पीरामल, निरमा, पाटनी कंप्यूटर सिस्टम्स, फाईजर, पोलारिस साफ्टवेयर, पंजाब ट्रेक्टर्स, रेमंड, रिलायंस केपिटल,रिलायंस पेट्रोलियम,स्टरलाईट, सिंडीकेट बैंक, टाटा टेलीसर्विसेज, टीवीएस मोटर, यूनियन बैंक।     

  जूनियरबीस में शामिल सारी कंपनियां अपने उद्योगों की शीर्ष कंपनियां नहीं हैं। पर वे उभरती हुई कंपनियां हैं, तेजी से बाजार में अपनी जगह बनाती हुई कंपनियां हैं। निफ्टी जूनियर सूचकांक ऐसी ही कंपनियों का प्रतिनिधित्व करता है। जूनियरबीस की निवेश रणनीति इसी निफ्टी जूनियर पर केंद्रित है।      

गौरतलब है कि मंझोली और छोटी कंपनियों में विकास की रफ्तार कमोबेश ज्यादा हो सकती है, उन कंपनियों के मुकाबले जो बहुत बड़ी हैं।       तेजी से विकसित होती अर्थव्यवस्था में ये कंपनियां भी तेजी से बढ़ेंगी और बढ़ेगा निवेशकों का प्रतिफल। शेयर बाजार में निवेश की शुरुआत करने वाले कम जोखिम वाले इस निवेश से शुरुआत कर सकते हैं। आलोक पुराणिक मोबाइल-09810018799

June 14, 2007 Posted by smartnivesh | Uncategorized | | No Comments Yet